चुनाव जीतने के बाद क्यों बढ़ती है।सांसद विधायक की बेहिसाब संपत्ति?

एक अनपढ़ नेता राजनीति में अपना कैरियर बनाने के लिए जैसे ही पार्टी कोई राजनीतिक पार्टी ज्वाइन करता या बनाता है। तो हमें अच्छे से समझना चाहिए बस सिर्फ अपने बिजनेस को और ज्यादा मजबूत करने के लिए सत्ता में उतर रहा है। ना कि समाज सेवा के लिए।

दोस्तों में अपने लेख के माध्यम से देश की जनता यह बताना चाहता हूं कि देश के अनपढ़ नेता ना तो आप को रोजगार देंगे नहीं आपको नौकरी देंगे ना ही आपको घर तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क और ना ही आपको आपके बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए कोई काम करेंगे।

लेकिन यह नेता सांसद विधायक बनने के बाद आपको जाति धर्म पर लड़ाने का काम करेंगे। और हमारे देश की जनता बखूबी इन नेताओं के जाल में फस कर जाति धर्म के नाम पर दंगे करते हैं जिसका खामियाजा देश की जनता को उठाना पड़ता है।

एक सत्ताधारी सांसद एवं विधायक अपने क्षेत्र से चुने जाने के बाद 10 से 20 करोड़ कमाने की क्षमता रखता है।

दर्शन केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सांसद विधायक को दो 1 साल में जो विकास निधि की राशि आती है। उसमें हर सांसद विधायक 20% से 30% कमीशन लेता है। और साथ-साथ कार्यदाई संस्था बीच में 20% कमीशन लेती है। दर्शन जो भी काम दरअसल जो भी काम सांसद और विधायक निधि के निकलते हैं उसमें सिर्फ काम उन्हीं को मिलता है जो सांसद विधायक के रिश्तेदार होते हैं या पहले कमीशन देने वाला।

जिले के हर विभाग से सांसद विधायक के पास मोटा कमीशन पहुंचता है।

और जो सांसद विधायक राज्य देश की सत्ता में किसी बड़े अथॉरिटी का अध्यक्ष बनता है केंद्रीय मंत्री बनता है तुम्हें 1 साल में 200 से 300 करोड़ रुपए कमाता है। जबकि देश का व्यापारी अपने व्यापार को बमुश्किल लोन लेकर व्यापार खड़ा करता है। सरकार और नेताओं की नीति के कारण व्यापारी हमेशा समस्याओं में उलझा रहता है।

अगर जब भी आप एक नवनियुक्त सांसद विधायक का 1 साल की संपत्ति का आकलन करके देखना तो आपको खुद ही मालूम पड़ जाएगा जो सांसद विधायक जनता की सेवा की दुहाई देता है उसके बाद आखिर इतनी संपत्ति कहां से आई। अपने देश में बेहद शर्म की बात है जितनी भी जांच एजेंसी हैं बस सिर्फ सरकार के पालतू कुत्ते की तरह। वह सिर्फ उन्हीं लोगों की जांच करती है। जो विपक्ष के सांसद और विधायक होते हैं या फिर उनके मिलने वाले रिश्तेदार नौकरशाह होते हैं।

इसलिए विपक्ष के लोग सत्ताधारी के नेताओं के दबाव में आकर काम करते हैं। जिन नेताओं को देश की जनता अपनी बेशकीमती बोर्ड से चुनकर भेजती है सरकार चुने जाने के समय जनता की जिम्मेदारी पर खरा न उतर कर कौड़ियों के भाव बिक जाते हैं। ऐसे नेताओं पर आम आप उम्मीद लगा कर बैठे हैं खुद बिकाऊ है तो आपका क्या काम कर सकते हैं।

मेरा मानना अगर एक शिक्षित नौजवान जब संसद या विधानसभा चुनकर पहुंचता है। सुबह देश को अच्छे से चला सकता है लेकिन अनपढ़ स्वार्थी नेता चुनकर जब संसद एवं विधान सभा जाता है तो उससे एक पैसे की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

आज के समय में टीवी और पेपर मीडिया सरकार के नेताओं की पैरों की जूती बन चुकी है।यह बिकाऊ मीडिया वाले सिर्फ पैसे देता है उन्हीं की खबर को पब्लिश करते हैं।

अगर आप देश के सच्चे नागरिक हैं आप को अपने देश के लिए लड़ना होगा अपने देश को इन गद्दार नेताओं से बचाना होगा। अगर आप सुखी रहेगा उम्मीद है यह देश को कोई नहीं बचा सकता।

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