जीएसटी सेंटर की लापरवाही के चलते क्यों अटक रहा है। हजारियों व्यापारियों को अप्रूवल?

कोविड-19 महामारी ने जहां दुनियाभर में त्राहिमाम त्राहिमाम मचाया है। दुनिया भर के लोगों दिल में एक ऐसा खौफ एक ऐसा डर बैठ जाए जाने का नाम नहीं ले रहा है। कोविड-19 महामारी की दहशत के चलते राज्य और केंद्र सरकार के नौकरशाह अपने कार्य स्थल पर कार्य करने से कतरा रहे हैं ताकि वह कोविड-19 महामारी से बच सकें। उबर ईट्स महामारी के चलते केंद्र और राज्य सरकारें अपने देश की जनता को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। अगर हम भारत के कोविड-19 के आंकड़ों की बात करें तो भारत में 31 जून 2000 की रिपोर्ट के आधार पर रोना वायरस के मरीजों की संख्या ढाई लाख के आसपास पहुंच चुकी है जिसके चलते देश की जनता के बीच कोविड-19 का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है और राज्य और केंद्र सरकार के नौकरशाह कोविड-19 के बहाने बनाकर तनखा तो सरकार की घर बैठे ले रहे हैं।लेकिन काम तो एक पैसे का नहीं कर रहे हैं इसके चलते केंद्र सरकार के तमाम पेंटिंग में पड़े हैं।

जीएसटी सेंटर क्यों अटका पड़ा है व्यापारियों का अप्रूवल

जहां एक तरफ एनडीए की केंद्र सरकार एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए कोस्टर फ्री लोन देने का काम कर रही है। तो वहीं दूसरी तरफ जीएसटी सेंटर के हरामखोर और नालायक नौकरशाह लगातार सरकार से तनखा लेने के बावजूद 15 मार्च के बाद कोई अप्रूवल नहीं दे रहे हैं उनका कहना है कोविड-19 वजह से वह अपने कार्यस्थल पर नहीं जा पाए। जीएसटी कि इन अफसरों का कहना है कि वह घर पर रहकर सारे काम निपटा हैं लेकिन हकीकत हुई है मैं आराम से घर बैठकर सरकार की तनख्वाह पर ऐश कर रहे हैं। जनता का काम करना तो दूर उनसे मिलना भी नहीं चाह रहा है जिसके कारण जीएसटी सेंटर हापुड़ में व्यापारियों की हजारों साल अप्रूवल के लिए अटकी हैं। अपने अप्रूवल के लिए व्यापारिक दर-दर की ठोकरें धाराएं और जीएसटी हेल्पलाइन पर कॉल करके जानना चाह रहे हैं जिनका कोई संतोषजनक जवाब कर्मचारी नहीं दे पाए। ऐसी स्थिति में एक बात तो साफ होती है जहां एक तरफ केंद्र सरकार देश की जनता को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एमएसएमई स्कीम का सहारा ले रही है तो वही जीएसटी सेंटर के नौकरशाह सरकार की योजनाओं को वेदम करके हवा निकालने पर तुले हैं।

इसके चलते केंद्र सरकार का आत्म भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना चकनाचूर होते दिखाएं। जब तक व्यापारियों जीएसटी अप्रूवल नहीं मिलेगा तब तक व्यापारी अपना व्यापार शुरू नहीं कर सकता। और जीएसटी सेंटर नहीं चाहता कि व्यापारियों का अप्रूवल दिया जाए।

एक व्यापारी ने नाम ना सच छुपाने की शर्त पर बताया 28 मई अपना जीएसटी पंजीकृत के लिए ऑनलाइन आवेदन कर चुका हूं। जिसके अप्रूवल की फाइल जीएसटी सेंटर हापुड़ चली गई है। आज तक अप्रूवल नहीं हुई है। जब भी व्यापारी सीए या वकील ए आर एन नंबर यूज कर कर हर स्थिति जानना चाहते हैं जीएसटी पोर्टल उसे लगातार पेंडिंग प्रोसेस दिखा रहा है। और जीएसटी हेल्पलाइन व्यापारियों की सहायता के लिए सफेद हाथी बन चुकी हैं जो व्यापारी को संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं उधर जीएसडी सेंटर के नौकरशाह बैठकर मौज की तंखा ले रहे हैं। वह लगातार व्यापारी की जीएसटी अप्रूवल में कोई रुचि नहीं दिखा पा रहे हैं।

अगर केंद्र सरकार इन हरामखोर नौकरशाह पर शिकंजा कसना शुरू कर दे तो बस यह सब उसी दिन से काम करना शुरू कर देंगे। अब देखना ही है कि केंद्र सरकार कब एक्शन मोड पर आती है।

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